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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 20

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

अपनें चलत न आजु लगि अनभल काहुक कीन्ह। केहिं अघ एकहि बार मोहि दैअँ दुसह दुखु दीन्ह॥20॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अपनी चलते (जहाँ तक मेरा वश चला) मैंने आज तक कभी किसी का बुरा नहीं किया। फिर न जाने किस पाप से दैव ने मुझे एक ही साथ यह दुःसह दुःख दिया॥20॥

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