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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 104

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ। सखा अनुज सिय सहित बन गवनु कीन्ह रघुनाथ॥104॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब प्रभु श्री रघुनाथजी गणेशजी और शिवजी का स्मरण करके तथा गंगाजी को मस्तक नवाकर सखा निषादराज, छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजी सहित वन को चले॥104॥

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