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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 108

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

राम कीन्ह बिश्राम निसि प्रात प्रयाग नहाइ। चले सहितसिय लखन जन मुदित मुनिहि सिरु नाइ॥108॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामजी ने रात को वहीं विश्राम किया और प्रातःकाल प्रयागराज का स्नान करके और प्रसन्नता के साथ मुनि को सिर नवाकर श्री सीताजी, लक्ष्मणजी और सेवक गुह के साथ वे चले॥108॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 108 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik