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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 109

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

बिदा किए बटु बिनय करि फिरे पाइ मन काम। उतरि नहाए जमुन जल जो सरीर सम स्याम॥109॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तदनन्तर श्री रामजी ने विनती करके चारों ब्रह्मचारियों को विदा किया, वे मनचाही वस्तु (अनन्य भक्ति) पाकर लौटे। यमुनाजी के पार उतरकर सबने यमुनाजी के जल में स्नान किया, जो श्री रामचन्द्रजी के शरीर के समान ही श्याम रंग का था॥109॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 109 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik