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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 110

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सजल नयन तन पुलकि निज इष्टदेउ पहिचानि। परेउ दंड जिमि धरनितल दसा न जाइ बखानि॥110॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अपने इष्टदेव को पहचानकर उसके नेत्रों में जल भर आया और शरीर पुलकित हो गया। वह दण्ड की भाँति पृथ्वी पर गिर पड़ा, उसकी (प्रेम विह्वल) दशा का वर्णन नहीं किया जा सकता॥110॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 110 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik