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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 113

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

छाँह करहिं घन बिबुधगन बरषहिं सुमन सिहाहिं। देखत गिरि बन बिहग मृग रामु चले मग जाहिं॥113॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

रास्ते में बादल छाया करते हैं और देवता फूल बरसाते और सिहाते हैं। पर्वत, वन और पशु-पक्षियों को देखते हुए श्री रामजी रास्ते में चले जा रहे हैं॥113॥

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