ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 114

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

एक देखि बट छाँह भलि डासि मृदुल तृन पात। कहहिं गवाँइअ छिनुकु श्रमु गवनब अबहिंकि प्रात॥114॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कोई बड़ की सुंदर छाया देखकर, वहाँ नरम घास और पत्ते बिछाकर कहते हैं कि क्षण भर यहाँ बैठकर थकावट मिटा लीजिए। फिर चाहे अभी चले जाइएगा, चाहे सबेरे॥114॥

आगे पढ़ें — अयोध्या काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस