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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 120

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

एहि बिधि कहि कहि बचन प्रिय लेहिं नयन भरि नीर। किमि चलिहहिं मारग अगम सुठि सुकुमार सरीर॥120॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस प्रकार प्रिय वचन कह-कहकर सब नेत्रों में (प्रेमाश्रुओं का) जल भर लेते हैं और कहते हैं कि ये अत्यन्त सुकुमार शरीर वाले दुर्गम (कठिन) मार्ग में कैसे चलेंगे॥120॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 120 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik