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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 125

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तात बचन पुनि मातु हित भाइ भरत अस राउ। मो कहुँ दरस तुम्हार प्रभु सबु मम पुन्य प्रभाउ॥125॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(और कहा-) हे प्रभो! पिता की आज्ञा (का पालन), माता का हित और भरत जैसे (स्नेही एवं धर्मात्मा) भाई का राजा होना और फिर मुझे आपके दर्शन होना, यह सब मेरे पुण्यों का प्रभाव है॥125॥

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