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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 127

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ। जहँ न होहु तहँ देहु कहि तुम्हहि देखावौं ठाउँ॥127॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आपने मुझसे पूछा कि मैं कहाँ रहूँ? परन्तु मैं यह पूछते सकुचाता हूँ कि जहाँ आप न हों, वह स्थान बता दीजिए। तब मैं आपके रहने के लिए स्थान दिखाऊँ॥127॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 127 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik