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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 128

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

जसु तुम्हार मानस बिमल हंसिनि जीहा जासु। मुकताहल गुन गन चुनइ राम बसहु हियँ तासु॥128॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आपके यश रूपी निर्मल मानसरोवर में जिसकी जीभ हंसिनी बनी हुई आपके गुण समूह रूपी मोतियों को चुगती रहती है, हे रामजी! आप उसके हृदय में बसिए॥128॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 128 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik