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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 129

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सबु करि मागहिं एक फलु राम चरन रति होउ। तिन्ह कें मन मंदिर बसहु सिय रघुनंदन दोउ॥129॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

और ये सब कर्म करके सबका एक मात्र यही फल माँगते हैं कि श्री रामचन्द्रजी के चरणों में हमारी प्रीति हो, उन लोगों के मन रूपी मंदिरों में सीताजी और रघुकुल को आनंदित करने वाले आप दोनों बसिए॥129॥

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