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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 130

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात। मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात॥130॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे तात! जिनके स्वामी, सखा, पिता, माता और गुरु सब कुछ आप ही हैं, उनके मन रूपी मंदिर में सीता सहित आप दोनों भाई निवास कीजिए॥130॥

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