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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 133

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत। सोह मदनु मुनि बेष जनु रति रितुराज समेत॥133॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

लक्ष्मणजी और जानकीजी सहित प्रभु श्री रामचन्द्रजी सुंदर घास-पत्तों के घर में शोभायमान हैं। मानो कामदेव मुनि का वेष धारण करके पत्नी रति और वसंत ऋतु के साथ सुशोभित हो॥133॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 133 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik