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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 143

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भयउ निषादु बिषादबस देखत सचिव तुरंग। बोलि सुसेवक चारि तब दिए सारथी संग॥143॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मंत्री और घोड़ों की यह दशा देखकर निषादराज विषाद के वश हो गया। तब उसने अपने चार उत्तम सेवक बुलाकर सारथी के साथ कर दिए॥143॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 143 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik