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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 145

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

धाइ पूँछिहहिं मोहि जब बिकल नगर नर नारि। उतरु देब मैं सबहि तब हृदयँ बज्रु बैठारि॥145॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नगर के सब व्याकुल स्त्री-पुरुष जब दौड़कर मुझसे पूछेंगे, तब मैं हृदय पर वज्र रखकर सबको उत्तर दूँगा॥145॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 145 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik