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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 148

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु। सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु॥148॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मंत्री ने देखकर ‘जयजीव’ कहकर दण्डवत्‌ प्रणाम किया। सुनते ही राजा व्याकुल होकर उठे और बोले- सुमंत्र! कहो, राम कहाँ हैं ?॥148॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 148 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik