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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 150

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

प्रथम बासु तमसा भयउ दूसर सुरसरि तीर। न्हाइ रहे जलपानु करि सिय समेत दोउ बीर॥150॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामजी का पहला निवास (मुकाम) तमसा के तट पर हुआ, दूसरा गंगातीर पर। सीताजी सहित दोनों भाई उस दिन स्नान करके जल पीकर ही रहे॥150॥

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