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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 152

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

कहि प्रनामु कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह। थकित बचन लोचन सजल पुलक पल्लवित देह॥152॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रणाम कर सीताजी भी कुछ कहने लगी थीं, परन्तु स्नेहवश वे शिथिल हो गईं। उनकी वाणी रुक गई, नेत्रों में जल भर आया और शरीर रोमांच से व्याप्त हो गया॥152॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 152 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik