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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 154

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि। तलफत मीन मलीन जनु सींचत सीतल बारि॥154॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

रिय पत्नी कौसल्या के कोमल वचन सुनते हुए राजा ने आँखें खोलकर देखा! मानो तड़पती हुई दीन मछली पर कोई शीतल जल छिड़क रहा हो॥154॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 154 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik