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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 157

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

एहि बिधि सोचत भरत मन धावन पहुँचे आइ। गुर अनुसासन श्रवन सुनि चले गनेसु मनाई॥157॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी इस प्रकार मन में चिंता कर रहे थे कि दूत आ पहुँचे। गुरुजी की आज्ञा कानों से सुनते ही वे गणेशजी को मनाकर चल पड़े।157॥

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