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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 160

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरतहि बिसरेउ पितु मरन सुनत राम बन गौनु। हेतु अपनपउ जानि जियँ थकित रहे धरि मौनु॥160॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचन्द्रजी का वन जाना सुनकर भरतजी को पिता का मरण भूल गया और हृदय में इस सारे अनर्थ का कारण अपने को ही जानकर वे मौन होकर स्तम्भित रह गए (अर्थात उनकी बोली बंद हो गई और वे सन्न रह गए)॥160॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 160 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik