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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 161

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

हंसबंसु दसरथु जनकु राम लखन से भाइ। जननी तूँ जननी भई बिधि सन कछु न बसाइ॥161॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मुझे सूर्यवंश (सा वंश), दशरथजी (सरीखे) पिता और राम-लक्ष्मण से भाई मिले। पर हे जननी! मुझे जन्म देने वाली माता तू हुई! (क्या किया जाए!) विधाता से कुछ भी वश नहीं चलता॥161॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 161 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik