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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 163

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मलिन बसन बिबरन बिकल कृस शरीर दुख भार। कनक कलप बर बेलि बन मानहुँ हनी तुसार॥163॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कौसल्याजी मैले वस्त्र पहने हैं, चेहरे का रंग बदला हुआ है, व्याकुल हो रही हैं, दुःख के बोझ से शरीर सूख गया है। ऐसी दिख रही हैं मानो सोने की सुंदर कल्पलता को वन में पाला मार गया हो॥163॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 163 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik