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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 164

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मातु भरत के बचन मृदु सुनि पुनि उठी सँभारि। लिए उठाइ लगाइ उर लोचन मोचति बारि॥164॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी के कोमल वचन सुनकर माता कौसल्याजी फिर सँभलकर उठीं। उन्होंने भरत को उठाकर छाती से लगा लिया और नेत्रों से आँसू बहाने लगीं॥164॥

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