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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 165

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

पितु आयस भूषन बसन तात तजे रघुबीर। बिसमउ हरषु न हृदयँ कछु पहिरे बलकल चीर॥165॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे तात! पिता की आज्ञा से श्री रघुवीर ने भूषण-वस्त्र त्याग दिए और वल्कल वस्त्र पहन लिए। उनके हृदय में न कुछ विषाद था, न हर्ष!॥165॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 165 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik