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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 167

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

जे परिहरि हरि हर चरन भजहिं भूतगन घोर। तेहि कइ गति मोहि देउ बिधि जौं जननी मत मोर॥167॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो लोग श्री हरि और श्री शंकरजी के चरणों को छोड़कर भयानक भूत-प्रेतों को भजते हैं, हे माता! यदि इसमें मेरा मत हो तो विधाता मुझे उनकी गति दे॥167॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 167 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik