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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 168

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

मातु भरत के बचन सुनि साँचे सरल सुभायँ। कहति राम प्रिय तात तुम्ह सदा बचन मन कायँ॥168॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

माता कौसल्याजी भरतजी के स्वाभाविक ही सच्चे और सरल वचनों को सुनकर कहने लगीं- हे तात! तुम तो मन, वचन और शरीर से सदा ही श्री रामचन्द्र के प्यारे हो॥168॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 168 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik