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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 169

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु। उठे भरत गुर बचन सुनि करन कहेउ सबु साजु॥169॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(वशिष्ठजी ने कहा-) हे तात! हृदय में धीरज धरो और आज जिस कार्य के करने का अवसर है, उसे करो। गुरुजी के वचन सुनकर भरतजी उठे और उन्होंने सब तैयारी करने के लिए कहा॥169॥

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