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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 171

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ। हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ॥171॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मुनिनाथ ने बिलखकर (दुःखी होकर) कहा- हे भरत! सुनो, भावी (होनहार) बड़ी बलवान है। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं॥171॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 171 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik