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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 172

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सोचिअ गृही जो मोह बस करइ करम पथ त्याग। सोचिअ जती प्रपंच रत बिगत बिबेक बिराग॥172॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस गृहस्थ का सोच करना चाहिए, जो मोहवश कर्म मार्ग का त्याग कर देता है, उस संन्यासी का सोच करना चाहिए, जो दुनिया के प्रपंच में फँसा हुआ और ज्ञान-वैराग्य से हीन है॥172॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 172 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik