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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 180

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार। तेहि पिआइअ बारुनी कहहु काह उपचार॥180॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिसे कुग्रह लगे हों (अथवा जो पिशाचग्रस्त हो), फिर जो वायुरोग से पीड़ित हो और उसी को फिर बिच्छू डंक मार दे, उसको यदि मदिरा पिलाई जाए, तो कहिए यह कैसा इलाज है!॥180॥

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