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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 182

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

आपनि दारुन दीनता कहउँ सबहि सिरु नाइ। देखें बिनु रघुनाथ पद जिय कै जरनि न जाइ॥182॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सबको सिर झुकाकर मैं अपनी दारुण दीनता कहता हूँ। श्री रघुनाथजी के चरणों के दर्शन किए बिना मेरे जी की जलन न जाएगी॥182॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 182 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik