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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 187

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

सौंपि नगर सुचि सेवकनि सादर सकल चलाइ। सुमिरि राम सिय चरन तब चले भरत दोउ भाइ॥187॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

विश्वासपात्र सेवकों को नगर सौंपकर और सबको आदरपूर्वक रवाना करके, तब श्री सीता-रामजी के चरणों को स्मरण करके भरत-शत्रुघ्न दोनों भाई चले॥187॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 187 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik