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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 190

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

बिगत बिषाद निषादपति सबहि बढ़ाइ उछाहु। सुमिरि राम मागेउ तुरत तरकस धनुष सनाहु॥190॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(इस प्रकार श्री रामजी के लिए प्राण समर्पण का निश्चय करके) निषादराज विषाद से रहित हो गया और सबका उत्साह बढ़ाकर तथा श्री रामचन्द्रजी का स्मरण करके उसने तुरंत ही तरकस, धनुष और कवच माँगा॥190॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 190 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik