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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 198

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

जहँ सिंसुपा पुनीत तर रघुबर किय बिश्रामु। अति सनेहँ सादर भरत कीन्हेउ दंड प्रनामु॥198॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जहाँ पवित्र अशोक के वृक्ष के नीचे श्री रामजी ने विश्राम किया था। भरतजी ने वहाँ अत्यन्त प्रेम से आदरपूर्वक दण्डवत प्रणाम किया॥198॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 198 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik