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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 203

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग। कहत राम सिय राम सिय उमगि उमगि अनुराग॥203॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रेम में उमँग-उमँगकर सीताराम-सीताराम कहते हुए भरतजी ने तीसरे पहर प्रयाग में प्रवेश किया॥203॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 203 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik