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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 204

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान। जनम-जनम रति राम पद यह बरदानु न आन॥204॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मुझे न अर्थ की रुचि (इच्छा) है, न धर्म की, न काम की और न मैं मोक्ष ही चाहता हूँ। जन्म-जन्म में मेरा श्री रामजी के चरणों में प्रेम हो, बस, यही वरदान माँगता हूँ, दूसरा कुछ नहीं॥204॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 204 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik