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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 205

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल। भरत धन्य कहि धन्य सुर हरषित बरषहिं फूल॥205॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

त्रिवेणीजी के अनुकूल वचन सुनकर भरतजी का शरीर पुलकित हो गया, हृदय में हर्ष छा गया। भरतजी धन्य हैं, कहकर देवता हर्षित होकर फूल बरसाने लगे॥205॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 205 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik