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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 206

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तुम्ह गलानि जियँ जनि करहु समुझि मातु करतूति। तात कैकइहि दोसु नहिं गई गिरा मति धूति॥206॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

माता की करतूत को समझकर (याद करके) तुम हृदय में ग्लानि मत करो। हे तात! कैकेयी का कोई दोष नहीं है, उसकी बुद्धि तो सरस्वती बिगाड़ गई थी॥206॥

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