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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 210

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

पुलक गात हियँ रामु सिय सजल सरोरुह नैन। करि प्रनामु मुनि मंडलिहि बोले गदगद बैन॥210॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी का शरीर पुलकित है, हृदय में श्री सीता-रामजी हैं और कमल के समान नेत्र (प्रेमाश्रु के) जल से भरे हैं। वे मुनियों की मंडली को प्रणाम करके गद्गद वचन बोले-॥210॥

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