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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 212

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

करि प्रबोधु मुनिबर कहेउ अतिथि पेमप्रिय होहु। कंद मूल फल फूल हम देहिं लेहु करि छोहु॥212॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस प्रकार मुनिश्रेष्ठ भरद्वाजजी ने उनका समाधान करके कहा- अब आप लोग हमारे प्रेम प्रिय अतिथि बनिए और कृपा करके कंद-मूल, फल-फूल जो कुछ हम दें, स्वीकार कीजिए॥212॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 212 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik