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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 216

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

किएँ जाहिं छाया जलद सुखद बहइ बर बात। तस मगु भयउ न राम कहँ जस भा भरतहि जात॥216॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बादल छाया किए जा रहे हैं, सुख देने वाली सुंदर हवा बह रही है। भरतजी के जाते समय मार्ग जैसा सुखदायक हुआ, वैसा श्री रामचंद्रजी को भी नहीं हुआ था॥216॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 216 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik