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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 217

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

रामु सँकोची प्रेम बस भरत सप्रेम पयोधि। बनी बात बेगरन चहति करिअ जतनु छलु सोधि॥217॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचंद्रजी संकोची और प्रेम के वश हैं और भरतजी प्रेम के समुद्र हैं। बनी-बनाई बात बिगड़ना चाहती है, इसलिए कुछ छल ढूँढकर इसका उपाय कीजिए॥217॥

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