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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 220

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज। होत मगन बारिधि बिरह चढ़े बिबेक जहाज॥220॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रघुनाथजी के (श्याम) रंग का सुंदर जल देखकर सारे समाज सहित भरतजी (प्रेम विह्वल होकर) श्री रामजी के विरह रूपी समुद्र में डूबते-डूबते विवेक रूपी जहाज पर चढ़ गए (अर्थात्‌ यमुनाजी का श्यामवर्ण जल देखकर सब लोग श्यामवर्ण भगवान के प्रेम में विह्वल हो गए और उन्हें न पाकर विरह व्यथा से पीड़ित हो गए, तब भरतजी को यह ध्यान आया कि जल्दी चलकर उनके साक्षात्‌ दर्शन करेंगे, इस विवेक से वे फिर उत्साहित हो गए)॥220॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 220 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik