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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 222

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु। जात मनावन रघुबरहि भरत सरिस को आजु॥222॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(वह बोली-) देखो, ये भरतजी पिता के दिए हुए राज्य को त्यागकर पैदल चलते और फलाहार करते हुए श्री रामजी को मनाने के लिए जा रहे हैं। इनके समान आज कौन है?॥222॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 222 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik