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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 223

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु। जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु॥223॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

भरतजी का स्वरूप देखते ही रास्ते में रहने वाले लोगों के भाग्य खुल गए! मानो दैवयोग से सिंहलद्वीप के बसने वालों को तीर्थराज प्रयाग सुलभ हो गया हो!॥223॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 223 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik