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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 224

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

तेहि बासर बसि प्रातहीं चले सुमिरि रघुनाथ। राम दरस की लालसा भरत सरिस सब साथ॥224॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस दिन वहीं ठहरकर दूसरे दिन प्रातःकाल ही श्री रघुनाथजी का स्मरण करके चले। साथ के सब लोगों को भी भरतजी के समान ही श्री रामजी के दर्शन की लालसा (लगी हुई) है॥224॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 224 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik