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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 227

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

नाथ सुहृद सुठि सरल चित सील सनेह निधान। सब पर प्रीति प्रतीति जियँ जानिअ आपु समान॥227॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे नाथ! आप परम सुहृद् (बिना ही कारण परम हित करने वाले), सरल हृदय तथा शील और स्नेह के भंडार हैं, आपका सभी पर प्रेम और विश्वास है, और अपने हृदय में सबको अपने ही समान जानते हैं॥227॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 227 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik