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श्रीरामचरितमानस · अयोध्या काण्ड

अयोध्या काण्ड दोहा 229

अयोध्या काण्ड · Ayodhya Kaand

मूल पाठ

छत्रि जाति रघुकुल जनमु राम अनुग जगु जान। लातहुँ मारें चढ़ति सिर नीच को धूरि समान॥229॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

क्षत्रिय जाति, रघुकुल में जन्म और फिर मैं श्री रामजी (आप) का अनुगामी (सेवक) हूँ, यह जगत्‌ जानता है। (फिर भला कैसे सहा जाए?) धूल के समान नीच कौन है, परन्तु वह भी लात मारने पर सिर ही चढ़ती है॥229॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 229 अयोध्या काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik